हम शुरू से पढ़ते आ रहे है आँखे बंद करके आज्ञा चक्र पर ध्यान केंद्रित करो , लेकिन बहुत प्रयास करने पर भी इस विधि से ध्यान नहीं लग पाता , हमारा ध्यान भटकता ही रहता है क्योकि हम पूर्ण विधि जानते ही नहीं इसलिए हम ध्यान में सफल नहीं हो पाते ! आज हम ध्यान साधना करने की विधि ही बताएंगे जो की बहुत प्रभावी है !
ध्यान करने के लिए सबसे पहले शांत जगह चयन करे जहा किसी भी प्रकार की कोई बाहरी आवाज आप तक ना पहुंचे , यही कारण है साधक घर से बाहर एकांत में ध्यान करते है ताकि किसी भी प्रकार की आवाज हमे सुनाई न दे ! अगर आप घर से बाहर नहीं जा सकते है तो रात्रि १२ बजे के बाद समय चुने ध्यान साधना करने के लिए ! अब नीचे आसान लगाए कोई कंबल भी प्रयोग कर सकते है आसान केलिए , आसन हम इसलिए प्रयोग करते है ताकि जो ऊर्जा हमारी बनती है वो पृथ्वी में समाहित ना हो वो हमारे शरीर के अंदर ही बनी रहे ! अब आसन पर पद्मासन अवस्था में बैठे जो पद्मासन अवस्था में नहीं बैठ सकते वो सुखासन में भी बैठ सकते है , अब दोनों हाथो की उगलिया आपस में फसा लो और दोनों हाथो को मूलाधार चक्र पर रखे थोड़ा सा दबाव बनाये रखे , अब आँखे बंद करे और आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाए , जैसे ही ध्यान लगाएंगे आपका ध्यान इधर उधर भटकने लगेगा बहुत सारी बातेयाद आने लगेंगी , ये बाते इसलिये आने लगती है क्योकि आपका मष्तिष्क फ्री नहीं होता है , आपका ध्यान भटकता है तो भटकने दो आप उन बातो को सिर्फ एक चलचित्र की तरह देखो जैसे हम टीवी देखते है कुछ समय बाद ये बाते अपने आप कम होने लगेंगी और धीरे धीरे बिलकुल बंद हो जाएँगी , तब अपने ध्यान को ह्रदय पर ले जाये , ह्रदय के पास अनाहत चक्र होता है जब यहां भी ध्यान लग जाये तब ध्यान को नाभि पर लाये , नाभि में मणिपूरक चक्र होता है ! नाभि पर ध्यान को लगाए रखना है कम से कम २० मिंट , फिर धीरे धीरे इस टाइम हो बढ़ा ले ! ऐसे ही हर रोज आपको करना है ! धीरे धीरे आपका मूलाधार चक्र जागृत होने लगेगा ! अब एक रहस्य की बात बताता हु जो बहुत कम लोगो को ही पता है ! हमारे शरीर को ऊर्जा नाभि से ही प्राप्त होती है , नाभि से ही ये आत्मा परमात्मा से जुडी होती है इसलिए इस स्थान को जागृत करना बहुत जरुरी है ! हम सबसे बड़ी गलती यही करते है की सीधे ही आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाते है तो निराशा ही हाथ आती है क्योकि जो हमारी ऊर्जा का केंद्र है वो तो सुप्त पड़ा है तो चक्रो को ऊर्जा कहा से मिलेगी ! यहां तक पहुंचने पर आगे इसकी और विधिया है इसके बाद मंत्र का प्रयोग करते है , स्वास को नियंत्रित करते है , नाड़ियो को शुद्ध करते है , कुंडलनी जाग्रत करते है और सबसे महत्वपूर्ण बात जो ऊर्जा हमारे अंदर बनेगी उसको नियंत्रित कैसे करते है और कैसे उसको सभी अंगो तक पहुंचाया जाता है ये सभी बाते गुप्त है इनकी आदि अधूरी विधिया नेट या किताबो में मिल तो जाएगी लेकिन उसका कोई फायदा होता नहीं है क्योकि इसमें हमे स्टेप बाई स्टेप आगे बढ़ना होता है तभी हम आगे बढ़ पाएंगे !
बहुत से लोगो मेसेज आ रहे है की ये सभी गुप्त बाते है ऐसे ही लोगो के सामने बताना बहुत गलत है लेकिन मुझे उन लोगो की परवाह नहीं है और ऐसे लोग कृपा करके मुझे मेसेज न ही करे तो अच्छा है क्योकि इसका कोई लाभ नहीं होने वाला ! ये वो लोग है जो लोगो को गुरु नाम पर लूटते है उनको भय है की कही हमारी दुकान बंद न हो जाये क्योकि हमारी पोस्ट लाइक से ज्यादा शेयर हो रही जिसके कारण हमारे द्वारा बताई हुयी बाते बहुत लोगो तक पहुंच रही है ये सब आप सबकी सहायता से ही सम्भव हुआ है इसके लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद !
जय महाकाल
ध्यान करने के लिए सबसे पहले शांत जगह चयन करे जहा किसी भी प्रकार की कोई बाहरी आवाज आप तक ना पहुंचे , यही कारण है साधक घर से बाहर एकांत में ध्यान करते है ताकि किसी भी प्रकार की आवाज हमे सुनाई न दे ! अगर आप घर से बाहर नहीं जा सकते है तो रात्रि १२ बजे के बाद समय चुने ध्यान साधना करने के लिए ! अब नीचे आसान लगाए कोई कंबल भी प्रयोग कर सकते है आसान केलिए , आसन हम इसलिए प्रयोग करते है ताकि जो ऊर्जा हमारी बनती है वो पृथ्वी में समाहित ना हो वो हमारे शरीर के अंदर ही बनी रहे ! अब आसन पर पद्मासन अवस्था में बैठे जो पद्मासन अवस्था में नहीं बैठ सकते वो सुखासन में भी बैठ सकते है , अब दोनों हाथो की उगलिया आपस में फसा लो और दोनों हाथो को मूलाधार चक्र पर रखे थोड़ा सा दबाव बनाये रखे , अब आँखे बंद करे और आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाए , जैसे ही ध्यान लगाएंगे आपका ध्यान इधर उधर भटकने लगेगा बहुत सारी बातेयाद आने लगेंगी , ये बाते इसलिये आने लगती है क्योकि आपका मष्तिष्क फ्री नहीं होता है , आपका ध्यान भटकता है तो भटकने दो आप उन बातो को सिर्फ एक चलचित्र की तरह देखो जैसे हम टीवी देखते है कुछ समय बाद ये बाते अपने आप कम होने लगेंगी और धीरे धीरे बिलकुल बंद हो जाएँगी , तब अपने ध्यान को ह्रदय पर ले जाये , ह्रदय के पास अनाहत चक्र होता है जब यहां भी ध्यान लग जाये तब ध्यान को नाभि पर लाये , नाभि में मणिपूरक चक्र होता है ! नाभि पर ध्यान को लगाए रखना है कम से कम २० मिंट , फिर धीरे धीरे इस टाइम हो बढ़ा ले ! ऐसे ही हर रोज आपको करना है ! धीरे धीरे आपका मूलाधार चक्र जागृत होने लगेगा ! अब एक रहस्य की बात बताता हु जो बहुत कम लोगो को ही पता है ! हमारे शरीर को ऊर्जा नाभि से ही प्राप्त होती है , नाभि से ही ये आत्मा परमात्मा से जुडी होती है इसलिए इस स्थान को जागृत करना बहुत जरुरी है ! हम सबसे बड़ी गलती यही करते है की सीधे ही आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाते है तो निराशा ही हाथ आती है क्योकि जो हमारी ऊर्जा का केंद्र है वो तो सुप्त पड़ा है तो चक्रो को ऊर्जा कहा से मिलेगी ! यहां तक पहुंचने पर आगे इसकी और विधिया है इसके बाद मंत्र का प्रयोग करते है , स्वास को नियंत्रित करते है , नाड़ियो को शुद्ध करते है , कुंडलनी जाग्रत करते है और सबसे महत्वपूर्ण बात जो ऊर्जा हमारे अंदर बनेगी उसको नियंत्रित कैसे करते है और कैसे उसको सभी अंगो तक पहुंचाया जाता है ये सभी बाते गुप्त है इनकी आदि अधूरी विधिया नेट या किताबो में मिल तो जाएगी लेकिन उसका कोई फायदा होता नहीं है क्योकि इसमें हमे स्टेप बाई स्टेप आगे बढ़ना होता है तभी हम आगे बढ़ पाएंगे !
बहुत से लोगो मेसेज आ रहे है की ये सभी गुप्त बाते है ऐसे ही लोगो के सामने बताना बहुत गलत है लेकिन मुझे उन लोगो की परवाह नहीं है और ऐसे लोग कृपा करके मुझे मेसेज न ही करे तो अच्छा है क्योकि इसका कोई लाभ नहीं होने वाला ! ये वो लोग है जो लोगो को गुरु नाम पर लूटते है उनको भय है की कही हमारी दुकान बंद न हो जाये क्योकि हमारी पोस्ट लाइक से ज्यादा शेयर हो रही जिसके कारण हमारे द्वारा बताई हुयी बाते बहुत लोगो तक पहुंच रही है ये सब आप सबकी सहायता से ही सम्भव हुआ है इसके लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद !
जय महाकाल
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