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Thursday, 20 June 2019

एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के दर्शन हेतु

एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के दर्शन हेतु सनक, सनंदन आदि ऋषि बैकुंठ पधारे परंतु भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय ने उन्हें प्रवेश देने से इंकार कर दिया। ऋषिगण अप्रसन्न हो गए और क्रोध में आकर जय-विजय को शाप दे दिया कि तुम राक्षस हो जाओ। जय-विजय ने प्रार्थना की व अपराध के लिए क्षमा माँगी। भगवान विष्णु ने भी ऋषियों से क्षमा करने को कहा। तब ऋषियों ने अपने शाप की तीव्रता कम की और कहा कि तीन जन्मों तक तो तुम्हें राक्षस योनि में रहना पड़ेगा और उसके बाद तुम पुनः इस पद पर प्रतिष्ठित हो सकोगे। इसके साथ एक और शर्त थी कि भगवान विष्णु या उनके किसी अवतारी-स्वरूप के हाथों तुम्हारा मरना अनिवार्य होगा।
  1. पहले जन्म में हिरण्याक्ष व हिरण्यकशिपु राक्षसों के रूप में जन्मे।
  2. त्रेतायुग में ये दोनों भाई रावण और कुंभकर्ण के रूप में पैदा हुए !
  3. द्वापर युग में में कंश और शिशुपाल के रूप जन्म लिया !

तो हम सिर्फ अभी रावण के बारे ही बता रहे है ! सभी ने श्री राम जी के बारे में तो पढ़ा लेकिन रावण के बारे में नहीं ! रावण को लोगो ने हमेशा बुराई के प्रतीक के रूप में देखा लेकिन कभी उसकी अच्छी नहीं देखि आज कुछ ऐसी ही बाते आपको बता रहे है !
  1. सर्वपर्थम तो यही की जिसका गुरु सयम भगवान शिव हो वो गलत कैसे हो सकता है , रावण महापंडित के साथ साथ महान तांत्रिक भी था उन्होंने जनकल्याण के लिए बहुत ग्रंथो की रचना की जिसका लाभ लोग आज भी उठा रहे है !
  2. भगवान शिव से दीक्षा ली शक्तिया प्राप्त की देवो के अहंकार को तोडा लेकिन कभी स्वर्ग पर शासन नहीं किया , वो चाहते तो स्वर्ग पर शासन कर सकते थे लेकिन नहीं किया !
  3. सभी देव , ग्रह नक्षत्र रावण के इशारो से चलते थे इसका अर्थ वो अपना भाग्य खुद लिखते थे , तीनो कालो का ज्ञान था ! उनको पूर्ण ज्ञान था भविष्य में क्या होने वाला है ! वो चाहते तो अपना भविष्य आसानी से बदल सकते थे !
  4. रावण ने अपनी बहन सुपर्णखा के अपमान का बदला लेने केलिए माँ सीता को वन से उठा लाये ये जानतेहुए भी की वो साक्षात् माँ जगदम्बा है और लेकर अशोक वाटिका भी रखा वो चाहते तो अपने महल में भी रख सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योकि उनको पता था ऐसा करने पर माँ सीता ने जो श्री राम जी के साथ १४ वर्ष के वनवास का स्कल्प लिया है वो खंडित हो जायेगा ! 
  5. रावण ने विभीषण को लंका से बाहर निकाल दिया ये जानते हुए भी की वो श्री राम भक्त है वो चाहते तो उसको बंदी बना सकते थे लेकिन फिर भी श्री राम जी की सहायता के लिए उसको भेज दिया !
  6. श्री राम जी ने लंका विजय के लिए भगवान शिव के पूजन और स्थापना के लिए एक विद्वान पंडित की जरूरत पड़ी लेकिन वहा रावण के आलावा कोई नहीं था तब श्री राम जी ने रावण को इस पूजन के लिए निमत्रण दिया और रावण ने इस निमंत्रण को स्वीकार भी किया ! अपने शत्रु के लिए कोई पूजा नहीं करता वो भी तब जब उसी पर विजय के लिए हो !
  7. रावण इतना विद्वान था की उसकी मृत्यु से पहले श्री राम जी ने लक्ष्मण जी को रावण के पास भेजा उनसे ज्ञान प्राप्त करने के लिए और लक्ष्मण जी को ज्ञान भी दिया !
  8. रावण की मृत्यु के पश्चात श्री राम जी को ब्रह्म हत्या का दोष लग गया था इसी पाप मुक्ति के लिए श्री राम जी ने अश्वमेघ यज्ञ करवया था तब जाकर इस पाप से मुक्ति मिली थी ! लेकिन आज कल हर साल लोग रावण का पुतला बनाकर जलाते है तो उस पाप से मुक्ति लोगो को कैसे होगी ! एक गुनाह की सजा एक बार ही मिलती है बार बार नहीं लेकिन फिर भी लोग ऐसा करते है , लंका विजय के बाद भी सिर्फ अयोध्या में घी दिए जलाये थे और खुशिया मनाई थी लेकिन पुतला कभी नहीं जलाया !

और भी बहुत से तथ्य है जो कहते है रावण जैसा न कोई हुआ है इना कभी होगा उसमे बुराई से ज्यादा अच्छाई थी ! रावण का नाम नाथ सम्प्रदाय के ८४ सिद्ध में आता है , नाथ सम्प्रदाय में इनका नाम लंकनाथ जी है !
सीधा तो अर्थ है ये सब उन्होंनेअपने और सबंधियो के मोक्ष के लिए किया था , अगर रावण ना होता तो आज श्री राम जी का नाम भी ना होता, श्री राम जी भी सिर्फ रावण के लिए आये थे ! सभी अच्छाई के साथ साथ बुराई भी होती है , तभी कहा जाता है की कोई भी पूर्ण नहीं है ! अगर हम किसी में अच्छाई देखना चाहे तो अच्छाई भी दिखाई देगी लेकिन अगर हम सिर्फ बुराई ही देखेंगे तो बुराई ही दिखेंगी !

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