शरद पूर्णमासी
ज्योतिष के अनुसार, पूरे साल में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है
शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अपने इष्ट देव का पूजन करना चाहिए. इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी के दीपक जलाकर उसकी गन्ध पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए. .
इसके बाद उनके मंत्र की कम से कम 11 माला जाप करें.
मंत्र है- "ॐ ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नमः"
इस दिन सायंकाल में चन्द्रोदय होने पर घी मिश्रित खीर तैयार करे और बहुत-से पात्रों में डालकर उसे चन्द्रमा की चाँदनी में रखे . जब एक प्रहर (३ घंटे) बीत जाएँ, तब लक्ष्मीजी को सारी खीर अर्पण करें . . तत्पश्चात परिजनों . . मित्रों के साथ खीर ग्रहण करे
इस रात्रि की मध्यरात्रि में देवी महालक्ष्मी अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए संसार में विचरती हैं . . अतः इस रात्रि को जागरण अवश्य करना चाहिये
No comments:
Post a Comment