यह है अत्यन्त शक्तिशाली मन्त्र...
नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे
सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युग धारिणे नम:
सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युग धारिणे नम:
कर्ता करे न कर सकै, शिव करै सो होय।
तीन लोक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा न कोय!
हर हर महादेव् जय श्री महाकाल
हरो पीडा दास की, करो ह्रदय में वास
इस मन में बहुत है, महाकाल जी तेरा विश्वास
भगवान शंकर का पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय ही अमोघ एवं मोक्षदायी है, किंतु विषम काल में यदि भक्त पर कोई कठिन व्याधि या समस्या आन पड़े तब श्रद्धापूर्वक 'ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ' के मंत्र का एक लाख जप करना चाहिए। यह बड़ी से बड़ी समस्या और विघ्न को टाल देता है।
हरो पीडा दास की, करो ह्रदय में वास
इस मन में बहुत है, महाकाल जी तेरा विश्वास
भगवान शंकर का पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय ही अमोघ एवं मोक्षदायी है, किंतु विषम काल में यदि भक्त पर कोई कठिन व्याधि या समस्या आन पड़े तब श्रद्धापूर्वक 'ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ' के मंत्र का एक लाख जप करना चाहिए। यह बड़ी से बड़ी समस्या और विघ्न को टाल देता है।
नदी किनारे मंदिर तेरा तू भूतों का स्वामी है...
क्या मांगे हम मुह से तुझसे तू तो अन्तर्यामी है...❤🔱
क्या मांगे हम मुह से तुझसे तू तो अन्तर्यामी है...❤🔱
शिवोहम् महादेव
कृष्ण कृष्ण सोचते सोचते ,
कृष्ण कृष्ण में खो गये .
कृष्ण कृष्ण कहते कहते ,
कृष्ण कृष्ण के हो गये .
कृष्ण कृष्ण करते करते ,
कृष्ण कृष्ण में बस गये .
कृष्ण कृष्ण पढते पढते ,
कृष्ण कृष्ण को पा गये .
कृष्ण कृष्ण सुनते सुनते ,
कृष्ण कृष्ण में झुम गये .
कृष्ण कृष्ण छुते छुते ,
कृष्ण कृष्ण में समा गये .
कृष्ण कृष्ण निहारते निहारते ,
कृष्ण कृष्ण के शरण आ गये .
कृष्ण कृष्ण प्रिय प्रिय ,
कृष्ण कृष्ण के प्रियतम हो गये .
ज़य श्री कृष्णा ........
कृष्ण कृष्ण में बस गये .
कृष्ण कृष्ण पढते पढते ,
कृष्ण कृष्ण को पा गये .
कृष्ण कृष्ण सुनते सुनते ,
कृष्ण कृष्ण में झुम गये .
कृष्ण कृष्ण छुते छुते ,
कृष्ण कृष्ण में समा गये .
कृष्ण कृष्ण निहारते निहारते ,
कृष्ण कृष्ण के शरण आ गये .
कृष्ण कृष्ण प्रिय प्रिय ,
कृष्ण कृष्ण के प्रियतम हो गये .
ज़य श्री कृष्णा ........
हे जिव्हे भज विश्वनाथ बद्रीकेदारभस्मेश्वरा ।
भीमाशँकर बैजनाथह्यवढे नागेश्वरारामेश्वरा ।।
भीमाशँकर बैजनाथह्यवढे नागेश्वरारामेश्वरा ।।
ॐकारममलेश्वरं स्मरहरं महाकालं मल्लिकाऽर्जुनम् ।
ध्यायेत् त्र्यम्बकसोमनाथमनिशम् एकादशे ॐ नम: ।।
ध्यायेत् त्र्यम्बकसोमनाथमनिशम् एकादशे ॐ नम: ।।
तूलसी वृक्ष ना जानिये
गाय ना जानिये ढौर
माता पिता मनुष्य ना जानिये,
ये तीनो नन्द किशोर!!
गाय ना जानिये ढौर
माता पिता मनुष्य ना जानिये,
ये तीनो नन्द किशोर!!
अर्थात्:-- तूलसी को कभी
वृक्ष नही समझना चाहिए,
वृक्ष नही समझना चाहिए,
गाय को कभी पशु ना समझे!
और माता पिता को कभी मनुष्य ना समझे,
क्योकि ये तीनो तो साक्षात भगवान का रूप है !
और माता पिता को कभी मनुष्य ना समझे,
क्योकि ये तीनो तो साक्षात भगवान का रूप है !
जय श्री कृष्णा
मेरे श्याम
जोड़ के श्याम से नाता, मैंने खोला दिल का खाता
मेरा हिसाब अब तेरे हाथ, जाने अब तू दाता.
जय श्री श्याम जी
जय श्री श्याम जी
हर मंजर में मैं पाऊँ तुम्हे कैसे कहूँ श्याम कितना चाहूँ तुम्हे
बस तुमसे ही है ये जिन्दगी मेरी यूँ ही कैसे भूल जाऊँ तुम्हे
जय श्री श्याम जी
श्याम नाम अमृत की धारा श्याम नाम में शक्ति प्रबल
विधना का ये लेख पलट दे जिसका हो विश्वास अटल
जय श्री श्याम जी
श्याम तुम्हारे नाम की मिश्री
जब से होंठ लगाई है
अपनों की क्या बात करें
गैरों ने प्रीत निभाई है।
जय श्री श्याम जी
मेरे श्याम
पग पग तेरा है आसरा, हर पग पर तेरा है साथ
पग पग पे है रक्षा करता,साँवरा पकड के मेरा हाथ
जय श्री श्याम जी
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