Pages

Friday, 21 June 2019

श्रावण या सावन संस्कृत से प्राप्त हुआ शब्द है

श्रावण या सावन संस्कृत से प्राप्त हुआ शब्द है। भारत के पूरे उप महाद्वीप के लिए श्रावण या सावन का महीना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दक्षिण-पश्चिमी मानसून के आगमन से जुड़ा हुआ है। हिंदू धर्म के कई अनुयायियों के लिए श्रावण का महीना उपवास का महीना है, सावन माह में आने वाले सावन के सोमवार व्रत का भी बहुत महत्वा होता है।

पौराणिक हिन्दू मान्यता के अनुसार सावन का महीना बहुत पवित्र माना जाता है और ये भगवान शिव को समर्पित होता है। सोमवार भगवान शिव और मंगलवार को देवी पार्वती के व्रत का दिन माना जाता है। श्रावण माह में आने वाले सोमवार को ही सावन सोमवार कहते हैं।

सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित रहता है। इस माह में विधि पूर्वक शिवजी की आराधना करने से मनुष्य को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। हिंदू देवताओं में त्रिमूर्ति में से एक भगवान शिव देवों के देव, दूसरे ब्रह्मा और तीसरे विष्णु हैं।

भगवान शिव, अपने भक्तों के जीवन में कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करने में उनकी मदद करते हैं। भगवान शिव का आशीर्वाद चाहने वाले भक्तों को भक्ति और ईमानदारी के साथ शिव का पाठ करना चाहिए। यह महीना भगवान शिव को अत्याधिक प्रिय है और इस दौरान सारा वातावरण शिवमय होता है। कथा के अनुसार, एक बार देवी सती अपने पिता के बुलावे पर उनके घर गईं। वहां पहुंचकर देवी सती ने देखा कि उनके पिता उनके पति शिव जी का निरादर कर रहे हैं। उन्होंने देवी सती को भी उनके पति शिव के बारे में अपशब्द कहे।

देवी सती ये सब सहन नहीं कर पाईं और अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से उन्होंने शरीर त्याग दिया। देवी सती को महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का फल प्राप्त था। उन्होंने पार्वती के रूप में दूसरा जन्म राजा हिमालय और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में लिया। पार्वती ने युवावस्था के सावन महीने में कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया। इसी कारणवश सावन महिना शिव जी को प्रिय हो गया।

सावन महीना पूरी तरह से भगवान शिव जी की आराधना का महीना माना जाता है। यदि पूरे विधि-विधान से भगवान शिव जी की पूजा की जाए तो यह सभी प्रकार के दुखों और चिंताओं से मुक्ति प्राप्त होती है। 

No comments:

Post a Comment