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Wednesday, 15 May 2019

शिव उपदेश ।। भक्ति_क्या_है ??

शिव_उपदेश
भक्ति_क्या_है
 ??

आराध्य और भक्त को एक करने का मार्ग है भक्ति।
माध्यम है भक्ति, प्रेम से परिपूर्ण।
जहाँ प्रेम होता है, वहां भय कभी वास नही करता।
वर्चस्व नही होता, भ्रम नही होता, कामना नही होती, ईर्ष्या नही होती, अंधकार नही होता, केवल तुल्यता होती है।
कोई बड़ा नही होता, कोई छोटा नही होता।
आराध्य और भक्त की केवल एक ही इक्षा होती है, और वो है "मिलन"।
जहाँ पर ये मिलन होता है, ना ही वहाँ पाप है और ना ही पूण्य, ना जीवन है और ना ही मृत्यु, ना ही सुख की कामना और ना ही दुःख की चिंता।
वहाँ केवल पूर्णतः मुक्ति है। यही तो भक्ति है।
यही है भक्ति का उद्देश्य और भक्ति की यात्रा, और यही है भक्ति का गंतव्य।
अन्धविश्वास भक्ति नही, अहंकार भक्ति नही।
किन्तु अगर भक्त में अज्ञानता हो तो उसका समाधान अवश्य होता है। क्योंकि भक्त की आस्था उसे अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश तक अवश्य पहुँचाती है।

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