एकोहि शास्त्रं निखिल मंत्र विज्ञानंॐ निं निखिलेश्वराय नम:
काल भैरव साधना
काल भैरव साधना
भैरव का नाम भले ही डरावना और तीक्ष्ण लगता हो,परन्तु अपने साधक के लिए तो भैरव अत्यन्त सौम्य और रक्षा करने वाले देव हैं|
*साधना के लाभ*:-
१.तांत्रिक ग्रन्थों में इसे शत्रु स्तम्भन की श्रेष्ठ साधना के रूप में एकमत से स्वीकार किया गया है।
२.यदि शत्रुओं के कारण अपने प्राणों को संकट हो अथवा परिवार के सदस्यों या बाल- बच्चों को शत्रुओं से भय हो,तो यह साधना आत्म रक्षा कवच प्रदान करती है।
३.जब हर क्षण मृत्यु भय हो तो काल को टालने की यह साधना है।काल भैरव साधना अत्यन्त उपयोगी साधना है।
*"साधना विधान"*:-
यह साधना 10 नवंम्बर 2017 *"कालाष्टमी"* की रात्रि या किसी भी अष्टमी की रात्रि को प्रारम्भ करना चाहिए। स्नान से निवृत हो कर स्वच्छ लाल धोती पहन कर दक्षिण दिशा की ओर मुख कर लाल रंग के आसन पर बैठे,स्त्रियां लाल साड़ी धारण कर सकती हैं। गुरू पूजन कर परम पूज्य गुरूदेव से साधना सफलता हेतु प्रार्थना करें, एक माला *गुरू मंत्र* जप करे।साधना हेतु दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें।
इसके बाद बाजोट पर लाल वस्त्र के ऊपर एक थाली रखें, थाली में कुंकुंम या सिन्दूर से *ॐ भं भैरवाय नम:* लिख दें।फिर थाली के मध्य काल भैरव यंत्र और महामृत्युंजय गुटिका को स्थापित कर दें। *ॐ भं भैरवाय नम:* मंत्र बोलकर पंचोपचार पूजन सिन्दूर,अक्षत, पुष्प तथा धूप, दीप ,नैवेद्य से करें। लोहे की कुछ कीलें अपने पास पहलें से मंगा कर रख लें| यदि परिवार में सात सदस्य हैं,तो उन सबकी रक्षा के लिए सात कीलें पर्याप्त है।
प्रत्येक कील को मौली के टुकड़े से बांध दें| बांधते समय भी *ॐ भं भैरवाय नम:* का जप करें। फिर उन कीलों को अपने परिवार के जिन सदस्यों की रक्षा की कामना आपको करनी है,उनमें से प्रत्येक का नाम एक- एक कर बोलें और साथ ही साथ एक-एक कील यंत्र पर चढ़ाते जाएं। यह अपने लिए आत्म रक्षा बंध या कवच प्राप्त करने का प्रयोग है| फिर भैरव के निम्न स्तोत्र मंत्र का मात्र १०८ बार उच्चारण करें-
*यं यं यं यक्ष रूपं दशदिशिवदनं भूमि कम्पायमानं ।*
*सं सं सं संहारमूर्ति शुभ मुकुट जटाशेखरम् चन्द्रबिम्बम्।।*
*दं दं दं दीर्घकायं विकृतनख मुखं चौर्ध्वरोयं करालं।*
*पं पं पं पाप नाशं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्र पालम्।।*
*सं सं सं संहारमूर्ति शुभ मुकुट जटाशेखरम् चन्द्रबिम्बम्।।*
*दं दं दं दीर्घकायं विकृतनख मुखं चौर्ध्वरोयं करालं।*
*पं पं पं पाप नाशं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्र पालम्।।*
दायें हाथ की मुट्ठी में काली सरसों लेकर निम्न मंत्र का ११ बार उच्चारण करें--
*ॐ काल भैरव, श्मशान भैरव, काल रूप काल भैरव ! मेरी बैरी तेरो आहार रे ! काढ़ि करेजा चखन करो कट कट ! ॐ काल भैरव, बटुक भैरव,भूत भैरव, महा भैरव, महा भय विनाशनं देवता ! सर्व सिद्धिर्भवेत्।*
फिर अपने सिर पर से सरसों को तीन बार घुमाकर सरसों के दानों को एक कागज में लपेट कर रख दें| इसके बाद निम्न मंत्र का एक घण्टे तक जप करें-
*काल भैरव मंत्र*:-
।। *"ॐ भैरवाय वं वं वं ह्रां क्ष्रों नम:"*।।
।। *"ॐ भैरवाय वं वं वं ह्रां क्ष्रों नम:"*।।
यह केवल एक दिन का प्रयोग है। जप के बाद साधक आसन से उठ जाये,और भैरव के सामने जो भोग रखा है उसे तथा सरसों के दानों,यंत्र व गुटिका को साथ ले कर किसी चौराहे पर रख आएं। लोहे की कीलें किसी निर्जन स्थान पर फेंक दें,यह शत्रु बाधा निवारण का विशिष्ट प्रयोग है।
नमामि सदगुरुदेवं निखिलं नमामि
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