शिव_उपदेश
ॐ_का_अर्थ_क्या_है ??
ॐ_का_अर्थ_क्या_है ??
ॐ का शब्दार्थ नहीं हैं, क्योंकि; वस्तुतः ॐ शब्द ही नही है। शब्द सृष्टि से बने हैं और ये वही बता सकते हैं जो सृष्टि में हैं। किन्तु समस्त सृष्टि ॐ में है। इसलिए ॐ शब्दातित है। इसका अर्थ जाना नही जा सकता, केवल अनुभव किया जा सकता है। और ॐ का अनुभव तभी होगा, जब मनुष्य के मन में कोई विचार, कोई इक्षा, कोई स्वप्न न हो, कोई अपेक्षा ना हो, मन पूर्णतः शांत हो।
स्मरण रहे; ॐ का निर्माण नही किया जा सकता, ना किया गया है, क्योंकि; सृष्टि का निर्माण ही ॐ से हुआ है।
त्रिदेव और ॐ पृथक नही हैं। अपितु ॐ का उच्चारण, त्रिदेवों का उच्चारण है।
ॐ के उच्चारण से सभी त्रुटियाँ, मानसिक विकृतियाँ और वन्दनगान तक हो सकता है। इसलिए त्रिदेवों से पूर्व ॐ का उच्चारण किया जाता है।
सच्चे मन और एकाग्रता से ॐ का उच्चारण किया जाये, तो त्रिदेवों की अनुभूति एक साथ और एक स्थान पर की जा सकती है।
स्मरण रहे; ॐ का निर्माण नही किया जा सकता, ना किया गया है, क्योंकि; सृष्टि का निर्माण ही ॐ से हुआ है।
त्रिदेव और ॐ पृथक नही हैं। अपितु ॐ का उच्चारण, त्रिदेवों का उच्चारण है।
ॐ के उच्चारण से सभी त्रुटियाँ, मानसिक विकृतियाँ और वन्दनगान तक हो सकता है। इसलिए त्रिदेवों से पूर्व ॐ का उच्चारण किया जाता है।
सच्चे मन और एकाग्रता से ॐ का उच्चारण किया जाये, तो त्रिदेवों की अनुभूति एक साथ और एक स्थान पर की जा सकती है।
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