Pages

Sunday, 19 May 2019

रामचरित मानस चिंतन

🌿🌿🌿रामचरित मानस चिंतन 🌿🌿🌿
सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी॥
देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥

भावार्थ:-हे (भक्तों को मुँहमाँगा) वर देने वाली माँ पार्वती! हे त्रिपुर के शत्रु शिवजी की प्रिय पत्नी! आपकी सेवा करने से चारों फल सुलभ हो जाते हैं। हे देवी! आपके चरण कमलों की पूजा करके देवता, मनुष्य और मुनि सभी सुखी हो जाते हैं॥
जय सियाराम 

No comments:

Post a Comment