भगवान को क्या पसंद है ?
हम लोग हमेशा वही चीज चाहते हैं जो हमे पसंद होती है। चाहे वो संसार की वस्तु हो या व्यक्ति हो। जो चीज हमें पसंद नहीं है हम उसके बारे में न सोचते हैं न देखते हैं और न जानना चाहते हैं।लेकिन धन्य है वो भक्त जो ये जानना चाहते हैं की हमारे भगवान को क्या पसंद है? ध्यान रखना कि भगवान हमारी किसी वस्तु के भूखे नहीं हैं, वो हमारे किसी 56 भोग के भूखे नहीं हैं। वो तो केवल भाव के भूखे हैं। केवल प्रेम के भूखे हैं।
अब संत जन जो कहते हैं वो सुनिये। भगवान को भक्त का प्रेम पसंद है, उसका भाव पसंद है और भगवान भक्त से उसका मन चाहते हैं। अगर आप सच में कुछ देना चाहते हो और भगवान की पसंद का ख्याल रखना चाहते हों तो खुद को भगवान को दे दो।
क्योकि याद रखना केवल वो ही हमारे हैं। भगवान से एक ही बात कहो-प्रभु! मैं आपका और आप मेरे।
आप भगवान को प्रेम से भोग लगाइये वो खा लेंगे। भगवान को आप प्रेम से सुलाये वो सो जायेंगे। भगवान को आप प्रेम से नहलाये वो नहा लेंगे।
जो भी काम करें बस मन लगा कर करें। भगवान को दिखावा पसंद नही है। वो तो केवल निष्कपट प्रेम ही पसंद करते हैं।
भगवान ने कहा है कि — ‘निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा’
भगवान कहते हैं जिसका मन गंगा जी की तरह निर्मल है , जो छल-छिद्र और कपट से रहित है वो मुझे अत्यंत प्रिय है।
श्रीमद् भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं —मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥ गीता 12.8 ||
हे अर्जुन! मुझमें मन को लगा और मुझमें ही बुद्धि का निवेश कर, इसके उपरांत तू मुझमें ही निवास करेगा, इसमें कुछ भी संशय नहीं है।भगवान कहते हैं कि जो भक्त किसी प्रकार की इच्छा नही रखता, शुद्ध मन से मेरी भक्ति करता है और सभी कर्मो को मुझे अर्पित करता है ऐसा भक्त मुझे प्रिय है।
।। जय सिया राम जी ।।
।। ॐ नमह शिवाय ।।
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