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Sunday, 1 December 2019

वामदेवेश्वर महादेव

वामदेवेश्वर महादेव


त्रेता युग से विराजे है बाबा भोलेनाथ
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बांदा जिले के पहाडो मे विराजते है बाबा वामदेवेश्वर महादेव
यहां के श्रद्धालुओ का कहना है कि यूं तो बांबेश्वर में स्थित शिवलिंग की स्थापना का कही भी स्पष्ट उल्लेख नही है। बतातें है कि त्रेता युग में महर्षि बामदेव ने बांबेश्वर शिखर पर स्थित गुफा में तप व साधना की थी। यहां पर इन्हे सत्यम शिवम सुंदरम का बोध हुआ था। यही पर उन्हे भगवान शिव से साक्षात्कार हुआ। उसी समय शिवलिंग प्रगट हुए। जो बामदेवेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए।
बांबेश्वर शिखर के ऊपर सिद्धबाबा का मंदिर है। शिवमंदिर आने वाले ज्यादातर भक्त सिद्धबाबा के यहां माथा टेकने के लिए जाते है। कहते है यहां पर जो भी कामना की जाती है वह पूरी होती है। लोग यहां पर अपनी अर्जी एक कपडे़ में बांध देते है पूरी होने पर यहां पूजन को आते है। शिवरात्रि पर बाबा के दरबार में श्रद्धालुओं को तांता लगा रहा। भक्तों पूजन के बाद शिखर की मनोहारी छटाओं को आंनद भी लिया।
 शिवलिंग काफी प्राचीन है। यहां पर पूजन-अर्जन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। उनके भक्त पर किसी भी प्रकार संकट नही आता है।-

- वैसे भी शिव औद्यड़दानी है। उनसे मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है
यहां पर भक्त शुद्ध भावना से जो भी मांगता है। सब कुछ मिलता है। परिवार में किसी भी प्रकार का संकट नही आता है यदि आ भी गया तो वह कट जाता है।-

शिव तो महामृत्युंजय है। शिव ही तो संसार के पालक है। उनके पूजन अर्चन से बीमारी तो दूर काल भी दूर भाग जाता है। उनके भक्त को किसी भी प्रकार का कष्ट नही होता है,

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