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Friday, 9 July 2021

भगवान शिव का वार सोमवार माना जाता है

भगवान शिव का वार सोमवार माना जाता है। ऐसे में कहा जाता है कि यदि सोमवार को अगर भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा की जाए तो सारे क्लेशों से मुक्ति मिलती है और मनोकामना पूर्ण होती है। शिव सदा अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इसलिए मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोमवार को सुबह उठकर स्नान करके भगवान शिव की आराधना करें भगवान शंकर के साथ माता पार्वती और नंदी को गंगाजल चढ़ाएं। साथ ही इस दिन शिवजी पर खास तौर से चंदन, अक्षत, बिल्व पत्र, धतूरा या आंकड़े के फूल चढ़ाएं। ये सभी चीजें भगवान शिव की प्रिय हैं। इन्हें चढ़ाने पर भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते है। 

सोमवार के दिन भगवान शिवजी को घी, शक्कर, गेंहू के आटे से बने प्रसाद का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद धूप, दीप से आरती करें। प्रसाद को गुरुजनों, बुजुर्गों और परिवार, मित्र सहित ग्रहण करें।

मान्यता है कि सोमवार के दिन  महामृत्युंजय मंत्र का जाप 108 बार करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी। इसके अलावा भगवान के अन्य मंत्रों का भी स्मरण करने से भगवान की कृपा बरसती रहती है।

भगवान शिव का मंत्र- नम: शिवाय, ऊँ नम: शिवाय॥ 


शिव पूजा में इन बातों का रखें खास ध्यान:

शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें अर्पित की जाती हैं जो अन्य किसी देवता को नहीं चढ़ाई जाती, जैसे- आक, बिल्वपत्र, भांग आदि। इसी तरह माना जाता है कि शिव पूजा में कई ऐसी चीजें होती हैं जो आपकी पूजा का फल देने की बजाय आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं...


1. हल्दी: हल्दी खानपान का स्वाद तो बढ़ाती है साथ ही धामिज़्क कार्यों में भी हल्दी का महत्वपूर्ण स्थान माना गया है, लेकिन शिवजी की पूजा में हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। हल्दी उपयोग मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन में किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है, इसी वजह से महादेव को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती।

2. फूल: शिव को कनेर और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं हैं, शिव को केतकी और केवड़े के फूल चढ़ाने का निषेध किया गया है। 

3. कुमकुम या रोली: शास्त्रों के अनुसार शिव जी को कुमकुम और रोली नहीं लगाई जाती है। 

4. शिव पूजा में वर्जित है शंख: शंख भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय हैं, लेकिन शिव जी ने शंखचूर नामक असुर का वध किया था इसलिए शंख भगवान शिव की पूजा में वर्जित माना गया है।

5. नारियल पानी: नारियल पानी से भगवान शिव का अभिषेक नहीं करना चाहिए मान्यता के अनुसार नारियल को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए सभी शुभ कार्य में नारियल को प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया जाता है। लेकिन कहा जाता है कि शिव पर अर्पित होने के बाद नारियल पानी ग्रहण योग्य नहीं रह जाता है।

6. तुलसी दल: तुलसी का पत्ता भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए। इस संदर्भ में असुर राज जलंधर की कथा है जिसकी पत्नी वृंदा तुलसी का पौधा बन गई थी। भगवान शिव ने जलंधर का वध किया था इसलिए वृंदा ने भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करने की बात कही थी


शिव पूजन में चढऩे वाली चीजें...

जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, इत्र, चंदन, केसर, भांग। इन सभी चीजों को एक साथ मिलाकर या एक-एक चीज शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं। शिवपुराण में बताया गया है कि इन चीजों से शिवलिंग को स्नान कराने पर सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।


10 चीजें और उनसे मिलने वाले फल की यह मान्यता है...

1. मंत्रों का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाने से हमारा स्वभाव शांत होता है, आचरण स्नेेहमय होता है।

2. शहद चढ़ाने से हमारी वाणी में मिठास आती है।

3. दूध अर्पित करने से उत्तम स्वास्थ्य मिलता है।

4. दही चढ़ाने से हमारा स्वभाव गंभीर होता है।

5. शिवलिंग पर घी अर्पित करने से हमारी शक्ति बढ़ती है।

6. इत्र से स्नान करवाने से विचार पवित्र होते हैं। 

7. शिवजी को चंदन चढ़ाने से हमारा व्यक्तित्व आकर्षक होता है, समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।

8. केसर अर्पित करने से सौम्यता प्राप्त होती है।

9. भांग चढ़ाने से विकार और बुराइयां दूर होती हैं।

10. शक्कर चढ़ाने से सुख और समृद्धि बढ़ती है।


शिव पूजन की सामान्य विधि

जिस दिन शिव पूजन करना चाहते हैं, उस दिन सुबह स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पवित्र हो जाएं। इसके बाद घर के मंदिर में ही या किसी शिव मंदिर जाएं। मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के साथ माता पार्वती और नंदी को गंगाजल या पवित्र जल अर्पित करें। जल अर्पित करने के बाद शिवलिंग पर चंदन, चावल, बिल्वपत्र, आंकड़े के फूल और धतूरा चढ़ाएं।


पूजन में इस मंत्र का जप करें-

'मन्दारमालांकलितालकायै कपालमालांकितशेखराय।

दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नम: शिवायै च नम: शिवाय।।'


पूजा संपन्न करने के लिए भगवान शिव को घी, शक्कर का भोग लगाएं और इसके बाद धूप, दीप से आरती करें।

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