कृष्ण शब्द की ध्वनि पारलौकिक है। कृष्ण का अर्थ है सर्वाधिक आनंद। हर व्यक्ति आनंद चाहता है। पर हममें से कोई नहीं जानता कि इस आनंद को पूरी तरह कैसे प्राप्त किया जाए। जीवन की भौतिकवादी अवधारणा के साथ हम सुख प्राप्त करने की कोशिश में हर कदम पर हताश हैं, क्योंकि हमारे पास जीवन का वास्तविक आनंद प्राप्त करने के लिए जरूरी ज्ञान ही नहीं है। हम सब एक मित्र की खोज में हैं, जो हमें सच्ची शांति प्रदान करे। श्रीकृष्ण ही वह सच्ची शांति प्रदान कर सकते हैं।
कृष्ण हमारे साथ हमेशा हो सकते हैं, क्योंकि वह सर्वशक्तिमान हैं। इसीलिए वह अपने नाम से ही हमारे साथ हो सकते हैं। उनका नाम और वह अलग नहीं हैं। कृष्ण के सर्वशक्तिमान होने का अर्थ है कि उनसे संबंधित प्रत्येक वस्तु में समान शक्ति है। उदाहरण के लिए, अगर हम प्यासे हैं और पानी चाहते हैं, तो सिर्फ 'पानी-पानी' दोहराने से हमारी प्यास नहीं बुझेगी, क्योंकि पानी शब्द में पानी पीने के समान शक्ति नहीं है। हमें पदार्थ रूप में पानी की आवश्यकता है, तभी हमारी प्यास तृप्त होगी। पर पारलौकिक, निरपेक्ष दुनिया में, ऐसा कोई अंतर नहीं है। कृष्ण का नाम, कृष्ण का गुण, कृष्ण का वचन-सब कुछ कृष्ण है और वही संतुष्टि प्रदान करता है।
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