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Sunday, 1 December 2019

श्री मद्-भगवत गीता के बारे में

श्री मद्-भगवत गीता के बारे में


किसको किसने सुनाई?
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।

कब सुनाई?
आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।

भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
रविवार के दिन।


कोनसी तिथि को?
एकादशी

कहा सुनाई?
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।

कितनी देर में सुनाई?
लगभग 45 मिनट में

क्यू सुनाई?
 कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।

कितने अध्याय है?
कुल 18 अध्याय

कितने श्लोक है?
700 श्लोक

गीता में क्या-क्या बताया गया है?
ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।

गीता को अर्जुन के अलावा और किन किन लोगो ने सुना?
धृतराष्ट्र एवं संजय ने

अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
 भगवान सूर्यदेव को

गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उपनिषदों में

गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।

गीता का दूसरा नाम क्या है?
 गीतोपनिषद

गीता का सार क्या है?
प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना

गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40

अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है।

33 करोड नहीँ
33 कोटी देवी देवता हैँ हिंदू धर्म मेँ।

कोटि = प्रकार।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,
कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।

हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता है!

कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-
12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...!
8 प्रकार हे :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार है :-
रुद्र:, बहुरु, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शंभू, कार्नी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा और कपाली।

एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।

कुल:-
12+8+11+2=33 कोटी

सभी शिव प्रेमी ध्यान दें

सभी शिव प्रेमी ध्यान दें

महादेव
जिनकी माया महान तपस्वी, रिषी, मुनी, संत, महात्मा भी नहीं जान सके जिनके आगे सभी देव नतमस्तक हुऐ

महादेव
निराकार है, कण - कण में विधमान है सर्वशक्तिमान होते हुऐ भी पल मे मान जाते हैं
सिर्फ एक लोटा जल से ही रीझ जाते है

महादेव
जिनसे देवो ने ही नही दानवो ने भी तपस्या कर सिद्धिया प्राप्त की

महादेव
जिनकी महिमा का बखान देवता भी नहीं कर सके हम मनुष्यो के वश में कहां की उनकी महिमा का वर्णन कर सके

महादेव
जिन्होने सम्पूर्ण जगत मे जहां जहां भी उनके भक्तो पर संकट आया वहां प्रकट होकर भक्तो को संकट से निकालकर उनका उद्धार किया