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Friday, 21 June 2019

एक दिन कॉलेज में प्रोफेसर ने विद्यर्थियों से पूछा कि इस संसार में जो कुछ भी है उसे भगवान ने ही बनाया है न?

एक दिन कॉलेज में प्रोफेसर ने विद्यर्थियों से पूछा कि इस संसार में जो कुछ भी है उसे भगवान ने ही बनाया है न?

सभी ने कहा, “हां भगवान ने ही बनाया है।“
प्रोफेसर ने कहा कि इसका मतलब ये हुआ कि बुराई भी भगवान की बनाई चीज़ ही है।
प्रोफेसर ने इतना कहा तो एक विद्यार्थी उठ खड़ा हुआ और उसने कहा कि इतनी जल्दी इस निष्कर्ष पर मत पहुंचिए सर।
प्रोफेसर ने कहा, क्यों? अभी तो सबने कहा है कि सबकुछ भगवान का ही बनाया हुआ है फिर तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?

विद्यार्थी ने कहा कि सर, मैं आपसे छोटे-छोटे दो सवाल पूछूंगा। फिर उसके बाद आपकी बात भी मान लूंगा।

प्रोफेसर ने कहा, "तुम संजय सिन्हा की तरह सवाल पर सवाल करते हो। खैर पूछो।"

विद्यार्थी ने पूछा , "सर क्या दुनिया में ठंड का कोई वजूद है?"

प्रोफेसर ने कहा, बिल्कुल है। सौ फीसदी है। हम ठंड को महसूस करते हैं।

विद्यार्थी ने कहा, "नहीं सर, ठंड कुछ है ही नहीं। ये असल में गर्मी की अनुपस्थिति का अहसास भर है। जहां गर्मी नहीं होती, वहां हम ठंड को महसूस करते हैं।"

प्रोफेसर चुप रहे।

विद्यार्थी ने फिर पूछा, "सर क्या अंधेरे का कोई अस्तित्व है?"

प्रोफेसर ने कहा, "बिल्कुल है। रात को अंधेरा होता है।"

विद्यार्थी ने कहा, "नहीं सर। अंधेरा कुछ होता ही नहीं। ये तो जहां रोशनी नहीं होती वहां अंधेरा होता है।

प्रोफेसर ने कहा, "तुम अपनी बात आगे बढ़ाओ।"

विद्यार्थी ने फिर कहा, "सर आप हमें सिर्फ लाइट एंड हीट (प्रकाश और ताप) ही पढ़ाते हैं। आप हमें कभी डार्क एंड कोल्ड (अंधेरा और ठंड) नहीं पढ़ाते। फिजिक्स में ऐसा कोई विषय ही नहीं। सर, ठीक इसी तरह ईश्वर ने सिर्फ अच्छा-अच्छा बनाया है। अब जहां अच्छा नहीं होता, वहां हमें बुराई नज़र आती है। पर बुराई को ईश्वर ने नहीं बनाया। ये सिर्फ अच्छाई की अनुपस्थिति भर है।"

दरअसल दुनिया में कहीं बुराई है ही नहीं। ये सिर्फ प्यार, विश्वास और ईश्वर में हमारी आस्था की कमी का नाम है।

ज़िंदगी में जब और जहां मौका मिले अच्छाई बांटिए। अच्छाई बढ़ेगी तो बुराई होगी ही नहीं। 

भगवान सूर्य की महिमा


भगवान सूर्य की महिमा


हिन्दू धर्म में विविधता है, यहा देवी देवता भी बहुत से है | इन्ही में से एक देवता है सूर्य देव जो साक्षात दर्शन देते है और व्यक्ति, पेड़ पौधो और जानवरो को जीवन प्रदान करते है | अन्धकार को दूर करने वाले और रोशनी देने वाले सूर्य देवता के बिना किसी का भी जीवन अपूर्ण है | वेदो और पुराणों में सूर्य देव की महिमा को विस्तार से बताया गया है | इनका विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर कोणार्क में है |

भगवान सूर्य देवता महिमा
कैसे हुआ भगवान सूर्य का जन्म ?
एक बार देवता और दानवो के युद्ध में देवता पराजित हो गये थे | देव माता अदिति बहुत उदास हुई और उन्होंने तब  देवताओ के स्वर्ग वापसी के  लिए घोर तपस्या की , उन्हें वरदान मिला की भगवान् सूर्य उन्हें विजय दिलवाएंगे और वे अदिति के पुत्र रूप में जल्द ही अवतार लेंगे | समय आने पर सूर्य देवता का जन्म हुआ और उन्होंने देवताओ को असुरो पर विजय दिलवाई |


सूर्य के माता पिता और परिवार
भगवान सूर्य के पिता का नाम महर्षि कश्यप थे  और उनकी माँ अदिति थी  | अदिति के गर्भ से जन्म लेने के कारण इनका नाम आदित्य भी पड़ा | इनके जयकारे और आरती में कश्यप नंदन भी आता है |

सूर्य की पत्नी और पुत्र पुत्रियाँ 
भगवान सूर्य की दो पत्नियाँ बताई गयी है एक संज्ञा और दूसरी छाया | इनके पुत्र मृत्यु के देवता यमराज और शनिदेव जी है जिन्हें मनुष्यों के ऊपर न्याय के लिए कार्य दिया गया है | इनके अलावा यमुना, तप्ति, अश्विनी तथा वैवस्वत मनु भी सूर्य की ही संताने है | मनु को पहला मनुष्य माना जाता है |

सूर्य देवता की सवारी – सात घोड़ो वाला रथ
भगवान सूर्य का वाहन सात  घोड़ो वाला एक रथ है जिसके सारथी अरुण देव है | सूर्य देवता इस रथ में सवार है और सम्पूर्ण जगत में प्रकाश फैला रहे है |

क्यों सूर्य देवता के रथ में सात ही घोड़े है ?
मान्यता है की यह घोड़े 7 इसलिए है की यह सप्ताह के सात दिनों को दर्शाते है | दूसरा तर्क यह भी है की ये रथ के प्रत्येक घोड़े एक अलग रंग वाले है जो मिलकर एक पूरा  सात रंगों वाला इन्द्रधनुष की रचना करते है |

कैसे करे सूर्य देवता की पूजा
हमारे धर्मग्रंथो में बताया गया है की सुबह सूर्योदय से पूर्व उठ कर हमें नित्य कार्यो को संपन्न करके भगवान सूर्य की उपासना करनी चाहिए | सूर्य उपासना के बहुत सारे लाभ है | फिर आप भगवान सूर्य को जल से अर्ध्य दे | फिर सूर्य के 21 नाम पढ़े और उनसे अच्छे दिन की मनोकामना मांगे |


भगवान सूर्य देव के 21 महान नाम
विकर्तन यानी विपत्तियों को नष्ट करने वाले
विवस्वान यानी प्रकाश रूप
मार्तंड
भास्कर
रवि
लोकप्रकाशक
श्रीमान
लोक चक्षु
गृहेश्वर
लोक साक्षी
त्रिलोकेश
कर्ता
हर्ता
तमिस्त्रहा
तपन
तापन
शुचि यानी पवित्रतम
ब्रह्मा
सप्ताश्ववाहन
गभस्तिहस्त
सर्वदेवनमस्कृत


 मुख्य त्यौहार

भगवान सूर्य के पूजन के लिए सबसे बड़ा दिन मकर संक्रांति का माना गया है | इस दिन गंगा सागर तीर्थ यात्रा पर लाखो भक्त मेले में शामिल होते है | देश के अन्य तीर्थ स्थल  जैसे  काशी (वाराणसी ) , त्रिवेणी संगम,  हरिद्वार , पुष्कर , उज्जैन की शिप्रा ,  लोहार्गल आदि तीर्थ स्थलों पर भारी संख्या में श्रद्धालु स्नान करते है और भगवान सूर्य को जल से अर्ध्य देते है |