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Thursday, 6 June 2019

।। जय शिवे्श ।। ।। पट्टाभिलेख ।। "लख चौरासी नाशन हारे-:-महाकाल जग से है न्यारे". ।। नमस्कृतम् ।।

।। जय शिवे्श ।
जय शिवे्श शँकर वृषध्वजेश्वर मृगांकशेखर दिगंबर ।
जय श्मशाननाटक विषाणवादक हुताशभालक महत्तर ।।
जय सुरारिनाशन वृशेषवाहन भुजंगभूषण जटाधर ।
जय त्रिलोककारक त्रिलोकपालक त्रिलोकनाशक महेश्वर ।।
जय रवीन्दुपावक त्रिनेत्रधारक खलांधकांतक हतस्मर ।
जय कृतांगकेशव कुबेरबाँधव भवाज भैरव परात्पर ।।
जय विषाक्तकंठक कृतांतवंचक त्रिशूलधारक हताध्वर ।
जय पिनाकपंडित पिशाचमँडित विभूतिभूषित कलेवर ।।
जय कपालधारक कपालमालक चिताभिसारक शुभंकर ।
जय शिवामनोहर सतीसदीश्वर गिरीश शँकर कृतज्वर ।।
जय कुठारमंडित कुरंगरंगित वराभयान्वित चतुष्कर ।
जय सरोरुहाधित विधिप्रतिष्ठत पुरंदरार्चित पुरंदर ।।
जय हिमालयालय महामहोमय विलोकनोदय चराचर ।
जय पुनाहि भारत महीश भारत उमेश पर्वतसुतावर ।।
।। जय शिवे्श विश्वेष प्रभो । जय नाथ विश्वनाथ प्रभो ।।
। हर हर महादेव शँभो काशी विश्वनाथ गँगे ।
।। महादेव ।।

।। पट्टाभिलेख ।। 

" क्रीडाकुण्डलितोरगेश्वरतनूकारिधरूढाम्बरानुस्वारं कलयन्नकारकुचिराकार: कृपार्द्र: प्रभु: ।
विर्ष्णोर्विश्वतनोरवन्तिनगरीहृत्पुण्डरीके वसन्नोड्काराक्षरमूर्तिरस्यतु महाकालोऽन्तरालं सताम् ।। "
- श्री महाकालेश्वर मंदिर ( उज्जैन ) पार्श्व भाग मे स्थित सनातन पट्टाभिलेख मूल का संस्कृत रूपांतरण 
- ' क्रीड़ा ताण्डव नृत्य के समय कुण्डल के समान सिमटे हुये सर्पराज के शरीर की आकृतिवाले उकार और अकार रूप सुन्दर आकार एवं ( इन दोनों के योग से बने ) ओंकार पर आकाश रूप अनुस्वार के द्वारा अपने ॐ कार स्वरूप को बनाते हुये परम कृपालु प्रभु , विष्णु के विराट शरीर रूपी अवन्तिका नगरी के हृदय कमल मे स्थित ओंकाराक्षरमूर्ति भगवान महाकाल सज्जनों के अन्तराल - नास्तिकताजन्य दूरी को दूर हटायें '
। जय श्री महाकालेश्वर ।
।। महादेव ।।

"लख चौरासी नाशन हारे-:-महाकाल जग से है न्यारे"
भावार्थ~::आपके आराधन से चौरासी लाख योनि से मानव मुक्त होता है ऐसे महाकाल आप जग में सबसे निराले है..
।। नम: शँकरपार्वतीभ्याम् ।।
निरन्जनो निराकार एको देवो महेश्वर: ।
देवदेव महादेव कृपां कृत्वा ममोपरि ।
महेश्वरं नमस्कृत्य शैलजा गणनायकम् ।
गुरु च परमात्मानं भजे संसार तारणम् ।।
।। महादेव ।।

चल रहा हुं धूप में तो,
महाकाल तेरी छाया है,
शरण है तेरी सच्ची,
बाकी तो सब मोह माया है...!!


नमस्तेस्तु भगवन् l
विश्वेश्वराय महादेवाय l
त्रैय्मबकाय त्रिपुरान्तकाय l
त्रिकाग्नि कालाय l
कालाग्नि रुद्राय नीलकण्ठाय मृत्युंजयाय l
सर्वेश्वराय सदाशिवाय श्रीमान महादेवाय नमः ll



।। नमस्कृतम् ।।
शुद्धस्फटिकसँकाशं त्रिनेत्रं पन्चवक्त्रम् ।
गँगाधरं दशभुजं सर्वाभरणभूषितम् ।।
नीलग्रीवं शशाँकाकं नागयज्ञोपवीतिनम् ।।
व्याघ्रचर्मोत्तरीयं वच वरेण्यमभयप्रदम् ।।
कमण्डलवक्षसूत्राभ्यान्वितं शूलपाणिनम् ।।
ज्वलन्तं पिंगलजटाजूटमुद्योतकारिणम् ।।
अमृतेन युतं ह्रष्टमुमादेहार्धधारिणम् ।।
दिव्यसिहांसनासीनं दिव्यभोगसमन्वितम् ।।
दिग्देवतासमायुक्तं सुरासुरनमस्कृतम् ।।
नित्यं च शाश्वतं शुद्धं ध्रुवमक्षरमव्ययम् ।।
सर्वव्यापिनमीशानं रुद्रं वै विश्वरूपिणम् ।।
एवं ध्यात्वा द्विज: सम्यक ततो यजनभारभेत् ।।
।। महादेव ।।


।। जय पशुपतिनाथ ।।
ॐ महादेव शिवशंकर शँभो उमाकान्त हर त्रिपुरारे ।
मृत्युन्जय वृषभध्वज शूलिन् गँगाधर मृड मदनारे ।।
जय शिवशंकर गौरीशं वन्दे गंगाधरमीशम् ।
रुद्रं पशुपतिमीशानं कलये काशी पुरी नाथम् ।।
जय शम्भो जय शम्भो शिव गौरीशंकर जय शम्भो ।।
।। महादेव ।।


।। महादेव ।।
छोड़ना मुश्किल है और टिकना उससे भी मुश्किल
जितना छोड़ेगें उतना मिलेगा
सिर्फ इंतज़ार शर्त है ।
।। महादेव ।।


नमस्तेस्तु भगवन् l
विश्वेश्वराय महादेवाय l
त्रैय्मबकाय त्रिपुरान्तकाय l
त्रिकाग्नि कालाय l
कालाग्नि रुद्राय नीलकण्ठाय मृत्युंजयाय l
सर्वेश्वराय सदाशिवाय श्रीमान महादेवाय नमः ll


।। महादेव ।।
अहो कृपाल नेत्र भाल निर्गुणं निरंजनम् ।
त्रिकोक पाल व्याल माल कष्ट काल भंजनम् ।।
त्रिशूलधारी भूतचारी अर्धचन्द्र शेखरम् ।
वेदान्त शास्त्र शोधकं नमामि नाथ शंकरम् ।।
कैलाशवासी धाम काशी धारकं निराम़यम् ।
अघोर मन्त्र साधकं दिगम्बरं द्वित्रीयमशम् ।।
ब्रह्माण्ड भूप रूप भर्ग भूज भास्वरम् । वेदान्त - शास्त्र शोधकम् ...........नमाम्यहम् ।।
।। महादेव ।।

।। महादेव ।।
हे जिव्हे भज विश्वनाथ बद्रीकेदारभस्मेश्वरा ।
भीमाशँकर बैजनाथह्यवढे नागेश्वरारामेश्वरा ।।
ॐकारममलेश्वरं स्मरहरं महाकालं मल्लिकाऽर्जुनम् ।
ध्यायेत् त्र्यम्बकसोमनाथमनिशम् एकादशे ॐ नम: ।।
।। महादेव ।।


।। महादेव ।।
शँकराय शँकराय , शँकराय मङ्गलम् ।
सुन्दरी मनोहराय , शाश्वताय मङ्गलम् ।।
आनंद मङ्गलं , सच्चिदानन्द मङ्गलम् ।
परमानन्द मङ्गलं , देव महादेव मङ्गलम् ।।
।। महादेव ।।

।। महादेव ।।
दिल भी न जाने किस किस तरह ठगता चला गया
कोई अच्छा लगा - और बस लगता ही चला गया 
।। महादेव ।।

क्या शिवलिंग एक एटॉमिक ( आणविक ) रिएक्टर है ?

क्या शिवलिंग एक एटॉमिक ( आणविक ) रिएक्टर है ?....

शिवलिंग पर जल, बिल्व पत्र और आक क्यूं चढ़ाते हैं ?
भारत का रेडियो एक्टिविटी मैप उठा लो तो हैरान हो जाओगे~कि भारत सरकार के न्यूकिलिअर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योत्रिलिंगो के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है | 
शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लिअर रिएक्टर्स ही हैं तभी उनपर जल चढ़ाया जाता है ताकि वो शांत रहे। महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे बिल्व पत्र, आक, आकमद, धतूरा, गुड़हल, आदि सभी न्यूक्लिअर एनर्जी सोखने वाले हैं | 
क्यूंकि शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है तभी जल निकासी नलिका को लांघा नहीं जाता | भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिव लिंग की तरह है 
जैसे सूर्य पर जल चढाते समय , जल से होकर शरीर पर पड़ती सूर्य किरणे ,शारीरिक रोगों को नष्ट करती है , उसी प्रकार , शिवलिंग पर जल और दूध चढाते समय , शिवलिंग से निकलती अद्रश्य आणविक विकरण ऊर्जा ~जल से हानिरहित होकर ~अत्यंत लाभकारी बनकर ~सभी त्रितापो ~दैहिक दैविक तापो को नष्ट कर देती है 
शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते हुए जल के साथ मिल कर औषधि का रूप ले लेता है | 
इसीलिए ज्यादातर ज्योतिर्लिंग नदियो के किनारे स्थित है ~ हमारे बुजुर्ग हम लोगों से कहते रहे है ~ कि महादेव शिव शंकर अगर नराज हो जाएंगे तो प्रलय आ जाएगी |
ज़रा गौर करो, हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है | 
ये इस देश का दुर्भाग्य है कि हमारी परम्पराओं को समझने के लिए जिस विज्ञान की आवश्यकता है वो हमें पढ़ाया नहीं जाता, और विज्ञान के नाम पर जो हमें पढ़ाया जा रहा है उस से हम अपनी परम्पराओं को समझ नहीं सकते |
क्या आणविक ऊर्जा भी सदाशिव ,महाकाल का ही एक रूप है ? जी हाँ यही सत्य है~जब तक सात्विक बुद्धि से इसका उपयोग होता है~यह सदाशिव की तरह असीमित ऊर्जा के साथ सर्व सुख सम्पन्नता प्रदान करती है और दुरूपयोग होते ही महाकाल का रूद्र तांडव शुरू हो जाता है~
जिस संस्कृति की कोख से हमने जन्म लिया है वो सनातन है,
इसी विज्ञान को कालानतर में लुप्त होने से बचाने के लिए परम्पराओं का जामा पहनाया गया है, ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें |
"उँ त्रयम्बकम यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम -उर्वारुक मीव् बन्धनान, मृत्योरमुक्ष्यीयमामृतात"।
ॐ नमः शिवाय ।।