Pages

Sunday, 19 May 2019

हर हर शिव शम्भू जय जय तेरा

हर हर शिव शम्भू जय जय तेरा

एक बिल्व पत्र एक फुल और एक लोटा जल धार ।
दयालु रीझ के देत हैं, चन्द्रमौलि भगवान शिवफल चार ।।
सदाशिव सर्व वरदाता, दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।
हरे सब दु:ख भक्तन के, आशुतोष दयाकरहो तो ऐसा हो ।।
शिखर कैलाश के ऊपर, कल्पतरुओं की छाया मे ।
रमे नित संग माँ गिरिजा के, रमणधर गिरिजापतिहो तो ऐसा हो ।।
शीश पर गँग की धारा, सुहावने भाल मे लोचन ।
कला मस्तक मे चन्दर की, मनोहर भूतभावनहो तो ऐसा हो ।।
भयंकर हलाहल ज़हर जब निकला, क्षीरसागर के मंथन से ।
धरा सब कण्ठ मे पीकर, विषधर नीलकंठहो तो ऐसा हो ।।
सिरों को काट कर अपने, किया जब होम-हवन रावण ने ।
दिया सब राज दुनिया का, दिलावर औढ़रदानीहो तो ऐसा हो ।।
किया जब जा नन्दी ने वन मे, कठिन तप काल के डर से ।
बना मुख्य गण नन्ही को अपना, अमर किया महाकालहों तो ऐसा हो ।।
बनाये बीच अंतरिक्ष-सागर मे, नगर तीन दैत्य सेना ने ।
उड़ाये एक ही तीर से, त्रिपुरहर त्रिपुरारीहो तो ऐसा हो ।।
दक्ष के यज्ञ मे जा कर, तजी जब देह सती माँने ।
भेज वीरभद्र को पल भर मे यज्ञ विध्वंस करें, भयंकर महारूद्रहो तो ऐसा हो ।।
देव नर दैत्य गण सारे, जपे नित नाम शिवशंकरका ।
वो ब्रह्मानन्द दुनिया मे, उजागर शिवोऽमहो तो ऐसा हो ।।
सदाशिव सर्व वरदाता, दिगम्बर हो तो ऐसा हो ।
हरे सब दु:ख भक्तन के, आशुतोषदयाकर हो तो ऐसा हो ।।

।। हर हर शिव शम्भू जय जय तेरा ।।
।। हर हर महादेव ।।
।। शिव शिव महादेव ।।

एक खूबसूरत सोच

एक व्यक्ति एक दिन बिना बताए काम पर नहीं गया.....
मालिक ने, सोचा इस कि तन्खाह बढ़ा दी जाये तो यहऔर दिल्चसपी से काम करेगा... और उसकी तन्खाह बढ़ा दी... अगली बार जब उसको तन्खाह से ज़्यादा पैसे दिये तो वह कुछ नही बोला चुपचाप पैसे रख लिये... कुछ महीनों बाद वह फिर ग़ैर हाज़िर हो गया... मालिक को बहुत ग़ुस्सा आया... सोचा इसकी तन्खाह बढ़ाने का क्या फायदा हुआ यह नहीं सुधरेगाऔर उस ने बढ़ी हुई तन्खाह कम कर दी और इस बार उसको पहले वाली ही तन्खाह दी... वह इस बार भी चुपचाप ही रहा और ज़बान से कुछ ना बोला.... तब मालिक को बड़ा ताज्जुब हुआ…
उसने उससे पूछा कि जब मैने तुम्हारे ग़ैरहाज़िर होने के बाद तुम्हारी तन्खाह बढा कर दी तुम कुछ नही बोले और आज तुम्हारी ग़ैर हाज़री पर तन्खाह कम कर के दी फिर भी खामोश ही रहे.....!!
इस की क्या वजह है..? उसने जवाब दिया....जब मै पहले
ग़ैर हाज़िर हुआ था तो मेरे घर एक बच्चा पैदा हुआ था....!!
आपने मेरी तन्खाह बढ़ा कर दी तो मै समझ गया.....
परमात्मा ने उस बच्चे के पोषण का हिस्सा भेज दिया है......
और जब दोबारा मै ग़ैर हाजिर हुआ तो मेरी माता जी
का निधन हो गया था... जब आप ने मेरी तन्खाह कम
दी तो मैने यह मान लिया की मेरी माँ अपने हिस्से का
अपने साथ ले गयीं.....
फिर मै इस तनख्वाह की ख़ातिर क्यों परेशान होऊँ जिस का ज़िम्मा ख़ुद परमात्मा ने ले रखा है......!!

एक खूबसूरत सोच

अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया,
तो बेशक कहना, जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी और जो भी पाया वो प्रभू की मेहेरबानी थी, खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में, ज्यादा मैं मांगता. नहीं और कम वो देता नहीं.. I