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Sunday, 19 May 2019

प्रभु से मानसिक वार्तालाप

प्रभु से मानसिक वार्तालाप

1. हे नाथ! आप मुझे मुझसे अधिक जानते है । इसलिए मेरी इच्छा कभी पूर्ण न हो । आपकी इच्छा पूर्ण हो ।
2. हे नाथ! मेरे मन, वचन, कर्म से कभी भी किसी को भी किंचिन्मात्र दुःख न पहुँचे यह कृपा बनाये रखे ।
3. हे नाथ! मैं कभी न पाप देखूँ, न सुनू और न किसी के पाप का बखान करूँ । 
4. हे नाथ! शरीर के सभी इन्द्रियों से आठो पहर केवल आपके प्रेम भरी लीला का ही आस्वादन करता रहूँ ।
5. हे नाथ! प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थिति में भी आपके मंगलमय विधान देख सदैव प्रसन्न रहूँ ।
6. हे नाथ! अपने ऊपर महान से महान विपत्ति आने पर भी दूसरों को खुशी दिया करू ।
7. हे नाथ! अगर कभी किसी कारणवश मेरे वजह से किसी को दुःख पहुँचे तो उसी समय उसके चरणों में पड़कर क्षमा माँग लू ।
8. हे नाथ! आठो पहर रोम रोम से आपके नाम का जप होता रहे ।
9. हे नाथ! मेरे आचरण श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस के अनुकूल हो ।
10. हे नाथ! हरेक परिस्थिति में आपकी कृपा के दर्शन हो ।

शिव कौन है?

शिव कौन है?
महापुरूष हमें बताते हैं कि श्री राम ने रामेश्वरम में सर्वशक्तिमान शिव का आह्वान किया और श्री कृष्ण ने वृंदावन में गोपेश्वर में शिव का आह्वान करके उनकी पूजा अर्चनाकरनेकी पेशकश की। इन दोनो जगह पर आज भी प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं ! इन कथाओं से यह भी सच्चाई ग्यात होती है कि शिव के रूपों को सभी देवी-देवता , श्री राम और श्री कृष्ण भी परम पिता के रूप में पूजे जाते हैं। 
शिव की छवि को एक लिंगा के रूप मैं दिखाया जाता हैं, जो साबित करता है कि वह निराकार है! उन्हे किसी भी देवी-देवताओं की तरह पुरुष या महिला या मानव रूप में नही दिखाया गया है, लेकिन,वह एक प्रकाश बिंदु हैं। यही कारण है कि भारत में आज भी प्रसिद्ध शिव मंदिरों में शिव के १२ रूप को ज्योतिर्लिंग मठ कहा जाता है। 
निराकार भगवान शिव को त्रिमूर्ति भी कहाँ जाता हैं जो ब्रह्मा, विष्णु और शंकर के तीन सूक्ष्म देवताओं के निर्माता के रूप में दर्शाया गया है। शिवलिंग पर तीन निशान यह प्रतीक हैं की उन्हे, त्रिमूर्ति, त्रिनेत्री (जो ज्ञान की तीसरी आंख है), त्रिकालदर्शी (जो समय के तीनो पहलुओं को देखते है) और त्रिलोकिनाथ (तीनों लोकों के भगवान) ! 
शिव को शंभू या स्वयंभू भी कहा जाता हैं जिसका अर्थ है कि शिव परमात्मा हैं और उनके ऊपर कोई निर्माता नही है ! शब्द शिव का शाब्दिक अर्थ परोपकारी , परम अन्तरात्मा शिव सभी मनुष्यों को मुक्ति और मोक्ष देता है। 
इस प्रकार वह सही मायने में परमात्मा है।
ऊँ नमः शिवाय !!